top of page

श्री एकादशी माता की आरती

  • Writer: mohit goswami
    mohit goswami
  • Jan 5
  • 2 min read

ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता।

विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता॥

ॐ जय एकादशी...॥


तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी।

गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी॥

ॐ जय एकादशी...॥


मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।

शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई॥

ॐ जय एकादशी...॥


पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है।

शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै॥

ॐ जय एकादशी...॥


नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।

शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै॥

ॐ जय एकादशी...॥


विजया फागुन कृष्णपक्ष में शुक्ला आमलकी।

पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की॥

ॐ जय एकादशी...॥


चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली।

नाम बरुथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली॥

ॐ जय एकादशी...॥


शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी।

नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी॥

ॐ जय एकादशी...॥


योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृष्णपक्ष करनी।

देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी॥

ॐ जय एकादशी...॥


कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।

श्रावण शुक्ला होय पवित्रा आनन्द से रहिए॥

ॐ जय एकादशी...॥


अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।

इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला॥

ॐ जय एकादशी...॥


पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।

रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी॥

ॐ जय एकादशी...॥


देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।

पावन मास में करूं विनती पार करो नैया॥

ॐ जय एकादशी...॥


परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।

शुक्ल मास में होय पद्मिनी दुख दारिद्र हरनी॥

ॐ जय एकादशी...॥


जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।

जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै॥

ॐ जय एकादशी...॥



संयम, भक्ति और आत्मशुद्धि का पथ

जब जीवन की गति को थामकर आत्ममंथन की आवश्यकता होती है, तब श्री एकादशी माता की आरती मन को शांति और अनुशासन का अनुभव कराती है। एकादशी माता केवल व्रत का प्रतीक नहीं, बल्कि इंद्रिय संयम, श्रद्धा और वैराग्य की सजीव प्रेरणा हैं।

आरती के समय जलता हुआ दीप यह स्मरण कराता है कि उपवास केवल शरीर को नहीं, बल्कि मन और विचारों को भी शुद्ध करता है। एकादशी माता का स्मरण हमें भोग से ऊपर उठकर भक्ति और संतुलन का मार्ग दिखाता है।

श्री एकादशी माता की आरती हमें सिखाती है कि सच्ची साधना कठिन नियमों में नहीं, बल्कि नियमितता और पवित्र भावना में होती है। भगवान विष्णु को एकादशी अत्यंत प्रिय है, इसलिए यह दिन आत्मिक उन्नति का विशेष अवसर माना गया है।

जो श्रद्धा और संयम के साथ श्री एकादशी माता की आरती करता है, उसके जीवन में शांति, विवेक और आध्यात्मिक बल का विकास होता है।जहाँ एकादशी माता का स्मरण है,वहाँ मन स्वयं संयमित हो जाता है।यही श्री एकादशी माता की आरती की सच्ची महिमा है।

 
 
 

Comments


bottom of page