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श्री रामायण जी की आरती
आरती श्री रामायण जी की। कीरति कलित ललित सिया-पी की॥ गावत ब्राह्मादिक मुनि नारद। बालमीक विज्ञान विशारद। शुक सनकादि शेष अरु शारद। बरनि पवनसुत कीरति नीकी॥ आरती श्री रामायण जी की। कीरति कलित ललित सिया-पी की॥ गावत वेद पुरान अष्टदस। छओं शास्त्र सब ग्रन्थन को रस। मुनि-मन धन सन्तन को सरबस। सार अंश सम्मत सबही की॥ आरती श्री रामायण जी की। कीरति कलित ललित सिया-पी की॥ गावत सन्तत शम्भू भवानी। अरु घट सम्भव मुनि विज्ञानी। व्यास आदि कविबर्ज बखानी। कागभुषुण्डि गरुड़ के ही की॥ आरती श्री र
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Jan 52 min read


श्री एकादशी माता की आरती
ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता। विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता॥ ॐ जय एकादशी...॥ तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी। गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी॥ ॐ जय एकादशी...॥ मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी। शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई॥ ॐ जय एकादशी...॥ पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है। शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै॥ ॐ जय एकादशी...॥ नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै। शुक्लपक्ष में जया, कहावै, व
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Jan 52 min read


श्री ललिता माता की आरती
श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी। राजेश्वरी जय नमो नमः॥ करुणामयी सकल अघ हारिणी। अमृत वर्षिणी नमो नमः॥ जय शरणं वरणं नमो नमः। श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी॥ अशुभ विनाशिनी, सब सुख दायिनी। खल-दल नाशिनी नमो नमः॥ भण्डासुर वधकारिणी जय माँ। करुणा कलिते नमो नम:॥ जय शरणं वरणं नमो नमः। श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी॥ भव भय हारिणी, कष्ट निवारिणी। शरण गति दो नमो नमः॥ शिव भामिनी साधक मन हारिणी। आदि शक्ति जय नमो नमः॥ जय शरणं वरणं नमो नमः। जय त्रिपुर सुन्दरी नमो नमः॥ श्री मातेश्वरी जय त्रि
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Jan 51 min read


श्री गंगा जी की आरती
ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता। जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता॥ ॐ जय गंगे माता॥ चन्द्र-सी ज्योति तुम्हारी, जल निर्मल आता। शरण पड़े जो तेरी, सो नर तर जाता॥ ॐ जय गंगे माता॥ पुत्र सगर के तारे, सब जग को ज्ञाता। कृपा दृष्टि हो तुम्हारी, त्रिभुवन सुख दाता॥ ॐ जय गंगे माता॥ एक बार जो प्राणी, शरण तेरी आता। यम की त्रास मिटाकर, परमगति पाता॥ ॐ जय गंगे माता॥ आरती मातु तुम्हारी, जो नर नित गाता। सेवक वही सहज में, मुक्ति को पाता॥ ॐ जय गंगे माता पवित्रता, प्रवाह और मोक्ष की अनुभूति जब
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Jan 52 min read


श्री तुलसी जी की आरती
जय जय तुलसी माता, सबकी सुखदाता वर माता। सब योगों के ऊपर, सब रोगों के ऊपर,रुज से रक्षा करके भव त्राता। जय जय तुलसी माता।बहु पुत्री है श्यामा, सूर वल्ली है ग्राम्या,विष्णु प्रिय जो तुमको सेवे, सो नर तर जाता। जय जय तुलसी माता। हरि के शीश विराजत त्रिभुवन से हो वंदित,पतित जनों की तारिणि, तुम हो विख्याता।जय जय तुलसी माता। लेकर जन्म बिजन में आई दिव्य भवन में,मानव लोक तुम्हीं से सुख सम्पत्ति पाता। जय जय तुलसी माता। हरि को तुम अति प्यारी श्याम वर्ण सुकुमारी, प्रेम अजब है श्री हरि का
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Jan 52 min read


श्री वैष्णो देवी की आरती
जय वैष्णवी माता, मैया जय वैष्णवी माता।हाथ जोड़ तेरे आगे, आरती मैं गाता॥ शीश पे छत्र विराजे, मूरतिया प्यारी।गंगा बहती चरनन, ज्योति जगे न्यारी॥ ब्रह्मा वेद पढ़े नित द्वारे, शंकर ध्यान धरे।सेवक चंवर डुलावत, नारद नृत्य करे॥ सुन्दर गुफा तुम्हारी, मन को अति भावे।बार-बार देखन को, ऐ माँ मन चावे॥ भवन पे झण्डे झूलें, घंटा ध्वनि बाजे।ऊँचा पर्वत तेरा, माता प्रिय लागे॥ पान सुपारी ध्वजा नारियल, भेंट पुष्प मेवा।दास खड़े चरणों में, दर्शन दो देवा॥ जो जन निश्चय करके, द्वार तेरे आवे।उसकी इच्छा पूर
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Jan 52 min read


श्री अन्नपूर्णा जी की आरती
बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम... जो नहीं ध्यावे तुम्हें अम्बिके, कहां उसे विश्राम। अन्नपूर्णा देवी नाम तिहारो, लेत होत सब काम॥ बारम्बार... प्रलय युगान्तर और जन्मान्तर, कालान्तर तक नाम। सुर सुरों की रचना करती, कहाँ कृष्ण कहाँ राम॥ बारम्बार... चूमहि चरण चतुर चतुरानन, चारु चक्रधर श्याम। चंद्रचूड़ चन्द्रानन चाकर, शोभा लखहि ललाम॥ बारम्बार... देवि देव! दयनीय दशा में दया-दया तब नाम। त्राहि-त्राहि शरणागत वत्सल शरण रूप तब धाम॥ बारम्बार... श्रीं, ह्रीं श्रद्धा श्री ऐ विद्या श्र
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Jan 51 min read


श्री गायत्री माता की आरती
जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता। आदि शक्ति तुम अलख निरंजन जग पालन कर्त्री। दुःख शोक भय क्लेश कलह दारिद्र्य दैन्य हर्त्री॥१॥ ब्रह्मरूपिणी, प्रणत पालिनी, जगत धातृ अम्बे। भव-भय हारी, जन हितकारी, सुखदा जगदम्बे॥२॥ भयहारिणि, भवतारिणि, अनघे अज आनन्द राशी। अविकारी, अघहरी, अविचलित, अमले, अविनाशी॥३॥ कामधेनु सत-चित-आनन्दा जय गंगा गीता। सविता की शाश्वती, शक्ति तुम सावित्री सीता॥४॥ ऋग्, यजु, साम, अथर्व, प्रणयिनी, प्रणव महामहिमे। कुण्डलिनी सहस्रार सुषुम्रा शोभा गुण गरिमे॥५॥ स्वा
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Jan 52 min read


श्री संतोषी माता आरती
जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता । अपने सेवक जन को, सुख संपति दाता ॥ जय सुंदर चीर सुनहरी, मां धारण कीन्हो । हीरा पन्ना दमके, तन श्रृंगार लीन्हो ॥ जय गेरू लाल छटा छवि, बदन कमल सोहे । मंद हँसत करूणामयी, त्रिभुवन जन मोहे ॥ जय स्वर्ण सिंहासन बैठी, चंवर ढुरे प्यारे । धूप, दीप, मधुमेवा, भोग धरें न्यारे ॥ जय गुड़ अरु चना परमप्रिय, तामे संतोष कियो। संतोषी कहलाई, भक्तन वैभव दियो ॥ जय शुक्रवार प्रिय मानत, आज दिवस सोही । भक्त मण्डली छाई, कथा सुनत मोही ॥ जय मंदिर जगमग ज्योति, मंगल ध्वन
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Jan 52 min read


श्री राधा जी की आरती
आरती श्री वृषभानुसुता की । मंजु मूर्ति मोहन ममताकी ।। टेक ।। त्रिविध तापयुत संसृति नाशिनि, विमल विवेकविराग विकासिनि । पावन प्रभु पद प्रीति प्रकाशिनि, सुन्दरतम छवि सुन्दरता की ।। मुनि मन मोहन मोहन मोहनि, मधुर मनोहर मूरती सोहनि । अविरलप्रेम अमिय रस दोहनि, प्रिय अति सदा सखी ललिताकी ।। संतत सेव्य सत मुनि जनकी, आकर अमित दिव्यगुन गनकी, आकर्षिणी कृष्ण तन मनकी, अति अमूल्य सम्पति समता की ।। कृष्णात्मिका, कृषण सहचारिणि, चिन्मयवृन्दा विपिन विहारिणि । जगज्जननि जग दुःखनिवारिणि, आदि अनादिश
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Jan 51 min read


श्री सीता जी की आरती
सीता विराजित मिथिलाधाम सब मिल कर करें आरती। संग सुशोभित लछुमन-राम सब मिल कर करें आरती।। विपदा विनाशिनि सुखदा चराचर, सीता धिया बनि आयीं सुनयना घर। मिथिला के महिमा महान...सब मिल कर करें आरती।। सीता विराजित ... सीता सर्वेश्वरि ममता सरोवर, बायाँ कमल कर दायाँ अभय वर। सौम्या सकल गुणधाम.....सब मिल कर करें आरती।। सीता विराजित ... रामप्रिया सर्वमंगल दायिनि, सीता सकल जगती दुःखहारिणि। करें सबका कल्याण...सब मिल कर करें आरती।। सीता विराजित ... सीता-राम की जोड़ी अतिभावन, नैहर सासुर किया प
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Jan 52 min read


श्री लक्ष्मी जी की आरती
श्लोक- महालक्ष्मी नमस्तुभ्यं, नमस्तुभ्यं सुरेश्वरी ।हरिप्रिये नमस्तुभ्यं, नमस्तुभ्यं दयानिधे ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता मैया जय लक्ष्मी माता ।तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता ॥ॐ जय लक्ष्मी माता....उमा, रमा, ब्रम्हाणी, तुम जग की माता ।सूर्य चद्रंमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥ॐ जय लक्ष्मी माता....दुर्गारुप निरंजन, सुख संपत्ति दाता ।जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि सिद्धि धन पाता ॥ॐ जय लक्ष्मी माता....तुम ही पाताल निवासनी, तुम ही शुभदाता ।कर्मप्रभाव प्रकाशनी, भवनिधि की त्राता ॥ॐ जय लक्ष्मी मा
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Jan 52 min read


श्री सरस्वती जी की आरती
श्लोक-या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता,या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभि र्देवैः सदा वन्दिता,सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥1॥शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं,वीणापुस्तकधारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्।हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्,वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥2॥ जय सरस्वती माता, जय जय हे सरस्वती माता ।दगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥ जय सरस्वती माताचंद्रवदनि
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Jan 52 min read


श्री काली माता की आरती
मंगल की सेवा सुन मेरी देवा, हाथ जोड तेरे द्वार खडे। पान सुपारी ध्वजा नारियल ले ज्वाला तेरी भेट धरेसुन।।1।। जगदम्बे न कर विलम्बे, संतन के भडांर भरे। सन्तन प्रतिपाली सदा खुशहाली, जै काली कल्याण करे ।।2।। बुद्धि विधाता तू जग माता, मेरा कारज सिद्व रे। चरण कमल का लिया आसरा शरण तुम्हारी आन पडे।।3।। जब जब भीड पडी भक्तन पर, तब तब आप सहाय करे। गुरु के वार सकल जग मोहयो, तरूणी रूप अनूप धरेमाता।।4।। होकर पुत्र खिलावे, कही भार्या भोग करेशुक्र सुखदाई सदा। सहाई संत खडे जयकार करे ।।5।। ब्रह्
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Jan 42 min read


श्री पार्वती जी की आरती
जय पार्वती माता जय पार्वती माता ब्रह्मा सनातन देवी शुभफल की दाता ।। अरिकुलापदम विनाशिनी जय सेवक त्राता, जगजीवन जगदंबा हरिहर गुणगाता ।। सिंह को बाहन साजे कुण्डल हैं साथा, देबबंधु जस गावत नृत्य करा ताथा ।। सतयुग रूपशील अतिसुन्दर नाम सती कहलाता, हेमाचल घर जन्मी सखियन संग राता ।। शुम्भ निशुम्भ विदारे हेमाचल स्थाता, सहस्त्र भुजा धरिके चक्र लियो हाथा ।। सृष्टिरूप तुही है जननी शिव संगरंग राता, नन्दी भृंगी बीन लही है हाथन मद माता ।। देवन अरज करत तब चित को लाता, गावन दे दे ताली मन में
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Jan 42 min read


श्री दुर्गा जी की आरती
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी तुम को निस दिन ध्यावत मैयाजी को निस दिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवजी ।। जय अम्बे गौरी ॥ माँग सिन्दूर विराजत टीको मृग मद को । मैया टीको मृगमद को उज्ज्वल से दो नैना चन्द्रवदन नीको।। जय अम्बे गौरी ॥ कनक समान कलेवर रक्ताम्बर साजे। मैया रक्ताम्बर साजे रक्त पुष्प गले माला कण्ठ हार साजे।। जय अम्बे गौरी ॥ केहरि वाहन राजत खड्ग कृपाण धारी। मैया खड्ग कृपाण धारी सुर नर मुनि जन सेवत तिनके दुख हारी।। जय अम्बे गौरी ॥ कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती। मैया नासाग
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Jan 42 min read


श्री सूर्य देव की आरती
ऊँ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान। जगत् के नेत्र स्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा। धरत सब ही तव ध्यान, ऊँ जय सूर्य भगवान।। सारथी अरूण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।। अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटी किरण पसारे। तुम हो देव महान।। ऊँ जय सूर्य …… ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते।। फैलाते उजियारा जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान ।। ऊँ जय सूर्य …… संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते।। गोधुली बेला में हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान ।
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Jan 42 min read


श्री बृहस्पति देव की आरती
जय बृहस्पति देवा, ऊँ जय बृहस्पति देवा । छि छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा ॥ तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी । जगतपिता जगदीश्वर, तुम सबके स्वामी ॥ चरणामृत निज निर्मल, सब पातक हर्ता । सकल मनोरथ दायक, कृपा करो भर्ता ॥ तन, मन, धन अर्पण कर, जो जन शरण पड़े । प्रभु प्रकट तब होकर, आकर द्घार खड़े ॥ दीनदयाल दयानिधि, भक्तन हितकारी । पाप दोष सब हर्ता, भव बंधन हारी ॥ सकल मनोरथ दायक, सब संशय हारो । विषय विकार मिटाओ, संतन सुखकारी ॥ जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहत गावे । जेठानन्द आनन्दकर, सो निश्चय
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Jan 42 min read


श्री शनि देव जी की आरती
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी। सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥ जय.॥ श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी। नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥ जय.॥ किरीट मुकुट शीश रजित दीपत है लिलारी। मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥ जय.॥ मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी। लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥ जय.॥ देव दनुज ऋषि मुनि सुमरिन नर नारी। विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी ॥जय.॥ न्याय, धैर्य और आत्मबल का प्रकाश जब जीवन में कठिन समय, परीक्षा और संघर्ष आते हैं, तब श्री शनि देव जी की आरती
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Jan 41 min read


श्री चित्रगुप्त जी की आरती
ॐ जय चित्रगुप्त हरे, स्वामी जय चित्रगुप्त हरे।भक्त जनों के इच्छित, फल को पूर्ण करे॥ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥ विघ्न विनाशक मंगलकर्ता, सन्तन सुखदायी।भक्तन के प्रतिपालक, त्रिभुवन यश छायी॥ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥ रूप चतुर्भुज, श्यामल मूरति, पीताम्बर राजै।मातु इरावती, दक्षिणा, वाम अङ्ग साजै॥ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥ कष्ट निवारण, दुष्ट संहारण, प्रभु अन्तर्यामी।सृष्टि संहारण, जन दु:ख हारण, प्रकट हुये स्वामी॥ॐ जय चित्रगुप्त हरे...॥ कलम, दवात, शङ्ख, पत्रिका, कर में अति सोहै।वैजयन्ती वनमाला
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Jan 42 min read
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