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श्री अन्नपूर्णा जी की आरती

  • Writer: mohit goswami
    mohit goswami
  • Jan 5
  • 1 min read

बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम...


जो नहीं ध्यावे तुम्हें अम्बिके, कहां उसे विश्राम।


अन्नपूर्णा देवी नाम तिहारो, लेत होत सब काम॥ बारम्बार...


प्रलय युगान्तर और जन्मान्तर, कालान्तर तक नाम।


सुर सुरों की रचना करती, कहाँ कृष्ण कहाँ राम॥ बारम्बार...


चूमहि चरण चतुर चतुरानन, चारु चक्रधर श्याम।


चंद्रचूड़ चन्द्रानन चाकर, शोभा लखहि ललाम॥ बारम्बार...


देवि देव! दयनीय दशा में दया-दया तब नाम।


त्राहि-त्राहि शरणागत वत्सल शरण रूप तब धाम॥ बारम्बार...


श्रीं, ह्रीं श्रद्धा श्री ऐ विद्या श्री क्लीं कमला काम।


कांति, भ्रांतिमयी, कांति शांतिमयी, वर दे तू निष्काम॥ बारम्बार...



– अन्न, करुणा और तृप्ति का आशीर्वाद

जब जीवन में अभाव का भय या असंतोष मन को घेरने लगे, तब श्री अन्नपूर्णा जी की आरती भीतर विश्वास और तृप्ति का भाव जगा देती है। माता अन्नपूर्णा केवल भोजन की देवी नहीं, बल्कि पोषण, करुणा और उदारता का साकार स्वरूप हैं।

आरती के समय प्रज्वलित दीप यह स्मरण कराता है कि अन्न केवल पेट नहीं भरता, वह जीवन को संबल देता है। माता का स्मरण हमें कृतज्ञ बनाता है — उस हर दाने के लिए, जो प्रकृति और ईश्वर की कृपा से हमें मिलता है।

श्री अन्नपूर्णा जी की आरती हमें सिखाती है कि जहाँ भोजन का सम्मान होता है, वहाँ कभी कमी नहीं रहती। सेवा, दान और साझा करने की भावना ही माता अन्नपूर्णा की सच्ची भक्ति है।

जो श्रद्धा और निर्मल भाव से श्री अन्नपूर्णा जी की आरती करता है, उसके जीवन में संतोष, समृद्धि और परिवार में प्रेम बना रहता है।जहाँ अन्न का मान है,वहाँ जीवन धन्य होता है।यही श्री अन्नपूर्णा जी की आरती की दिव्य महिमा है।

 
 
 

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