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श्री तुलसी जी की आरती

  • Writer: mohit goswami
    mohit goswami
  • Jan 5
  • 2 min read

जय जय तुलसी माता, सबकी सुखदाता वर माता।


सब योगों के ऊपर, सब रोगों के ऊपर,रुज से रक्षा करके भव त्राता।


जय जय तुलसी माता।बहु पुत्री है श्यामा,


सूर वल्ली है ग्राम्या,विष्णु प्रिय जो तुमको सेवे, सो नर तर जाता।


जय जय तुलसी माता।


हरि के शीश विराजत त्रिभुवन से हो वंदित,पतित जनों की तारिणि,


तुम हो विख्याता।जय जय तुलसी माता।


लेकर जन्म बिजन में आई दिव्य भवन में,मानव लोक तुम्हीं से सुख सम्पत्ति पाता।


जय जय तुलसी माता।


हरि को तुम अति प्यारी श्याम वर्ण सुकुमारी,


प्रेम अजब है श्री हरि का तुम से नाता।जय जय तुलसी माता।



पवित्रता, भक्ति और सरल जीवन का संदेश

जब मन शुद्धता और स्थिरता की तलाश में होता है, तब श्री तुलसी जी की आरती घर और हृदय दोनों को पवित्र कर देती है। तुलसी जी केवल एक पौधा नहीं, बल्कि भक्ति, स्वास्थ्य और वैष्णव आस्था की जीवंत प्रतीक हैं।

आरती के समय जलता हुआ दीप और तुलसी दल की सुगंध वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा भर देती है। कहा जाता है कि जहाँ तुलसी का वास होता है, वहाँ नकारात्मकता ठहर नहीं पाती। उनका स्मरण हमें सादगी, संयम और नियमबद्ध जीवन का महत्व सिखाता है।

श्री तुलसी जी की आरती हमें यह समझाती है कि ईश्वर की भक्ति बड़े आडंबर में नहीं, बल्कि सरल भाव और शुद्ध आचरण में होती है। भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय हैं, इसलिए उनका पूजन हर वैष्णव परंपरा का आधार माना गया है।

जो श्रद्धा और नियम से श्री तुलसी जी की आरती करता है, उसके घर में शांति, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक संतुलन बना रहता है।जहाँ तुलसी का सम्मान है,वहाँ जीवन स्वतः पवित्र हो जाता है।यही श्री तुलसी जी की आरती की सच्ची महिमा है।

 
 
 

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