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श्री दुर्गा जी की आरती

  • Writer: mohit goswami
    mohit goswami
  • Jan 4
  • 2 min read

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी


तुम को निस दिन ध्यावत


मैयाजी को निस दिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवजी ।। जय अम्बे गौरी ॥



माँग सिन्दूर विराजत टीको मृग मद को । मैया टीको मृगमद को


उज्ज्वल से दो नैना चन्द्रवदन नीको।। जय अम्बे गौरी ॥



कनक समान कलेवर रक्ताम्बर साजे। मैया रक्ताम्बर साजे


रक्त पुष्प गले माला कण्ठ हार साजे।। जय अम्बे गौरी ॥



केहरि वाहन राजत खड्ग कृपाण धारी। मैया खड्ग कृपाण धारी


सुर नर मुनि जन सेवत तिनके दुख हारी।। जय अम्बे गौरी ॥



कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती। मैया नासाग्रे मोती


कोटिक चन्द्र दिवाकर सम राजत ज्योति।। जय अम्बे गौरी ॥



शम्भु निशम्भु बिडारे महिषासुर घाती। मैया महिषासुर घाती


धूम्र विलोचन नैना निशदिन मदमाती।। जय अम्बे गौरी ॥



चण्ड मुण्ड शोणित बीज हरे। मैया शोणित बीज हरे


मधु कैटभ दोउ मारे सुर भयहीन करे।। जय अम्बे गौरी ॥



ब्रह्माणी रुद्राणी तुम कमला रानी। मैया तुम कमला रानी


आगम निगम बखानी तुम शिव पटरानी।। जय अम्बे गौरी ॥



चौंसठ योगिन गावत नृत्य करत भैरों। मैया नृत्य करत भैरों


बाजत ताल मृदंग और बाजत डमरू।। जय अम्बे गौरी ॥



तुम हो जग की माता तुम ही हो भर्ता। मैया तुम ही हो भर्ता


भक्तन की दुख हर्ता सुख सम्पति कर्ता।। जय अम्बे गौरी ॥



भुजा चार अति शोभित वर मुद्रा धारी। मैया वर मुद्रा धारी


मन वाँछित फल पावत देवता नर नारी।। जय अम्बे गौरी ॥



कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती। मैया अगर कपूर बाती


माल केतु में राजत कोटि रतन ज्योती।। बोलो जय अम्बे गौरी ॥



माँ अम्बे की आरती जो कोई नर गावे। मैया जो कोई नर गावे


कहत शिवानन्द स्वामी सुख सम्पति पावे।। जय अम्बे गौरी


देवी वन्दना


या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।


नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ।।




शक्ति, संरक्षण और नारी चेतना का जागरण

जब जीवन में भय, असुरक्षा या संघर्ष का अनुभव होता है, तब श्री दुर्गा जी की आरती भीतर सोई हुई शक्ति को जागृत कर देती है। माता दुर्गा केवल शक्ति की देवी नहीं, बल्कि साहस, करुणा और संरक्षण का सजीव स्वरूप हैं।

आरती के समय जलता हुआ दीप यह संकेत देता है कि चाहे अंधकार कितना भी प्रबल क्यों न हो, शक्ति और धर्म की रोशनी उसे समाप्त कर सकती है। दुर्गा माता का स्मरण मन को निर्भय बनाता है और आत्मविश्वास से भर देता है।

श्री दुर्गा जी की आरती हमें यह सिखाती है कि सच्ची शक्ति क्रोध में नहीं, बल्कि संयम और धर्म में निहित होती है। माँ का हर रूप — शैलपुत्री से लेकर सिद्धिदात्री तक — जीवन के हर संघर्ष में हमें मार्गदर्शन देता है।

जो श्रद्धा और विश्वास से श्री दुर्गा जी की आरती करता है, उसके जीवन में नकारात्मक शक्तियाँ दूर रहती हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।जहाँ माँ दुर्गा का नाम है,वहाँ भय नहीं — केवल शक्ति और विश्वास है।यही श्री दुर्गा जी की आरती की दिव्य महिमा है।

 
 
 

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