श्री लक्ष्मी जी की आरती
- mohit goswami
- Jan 5
- 2 min read
श्लोक-
महालक्ष्मी नमस्तुभ्यं, नमस्तुभ्यं सुरेश्वरी ।हरिप्रिये नमस्तुभ्यं, नमस्तुभ्यं दयानिधे ॥ॐ जय लक्ष्मी माता मैया जय लक्ष्मी माता ।तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता ॥ॐ जय लक्ष्मी माता....उमा, रमा, ब्रम्हाणी, तुम जग की माता ।सूर्य चद्रंमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥ॐ जय लक्ष्मी माता....दुर्गारुप निरंजन, सुख संपत्ति दाता ।जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि सिद्धि धन पाता ॥ॐ जय लक्ष्मी माता....तुम ही पाताल निवासनी, तुम ही शुभदाता ।कर्मप्रभाव प्रकाशनी, भवनिधि की त्राता ॥ॐ जय लक्ष्मी माता....जिस घर तुम रहती हो, ताँहि में हैं सद् गुण आता।सब सभंव हो जाता, मन नहीं घबराता॥ॐ जय लक्ष्मी माता....तुम बिन यज्ञ ना होता, वस्त्र न कोई पाता ।खान पान का वैभव, सब तुमसे आता ॥ॐ जय लक्ष्मी माता....शुभ गुण मंदिर सुंदर क्षीरनिधि जाता।रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता ॥ॐ जय लक्ष्मी माता....महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता ।उँर आंनद समाा, पाप उतर जाता ॥ॐ जय लक्ष्मी माता....स्थिर चर जगत बचावै, कर्म प्रेर ल्याता ।रामप्रताप मैया जी की शुभ दृष्टि पाता ॥ॐ जय लक्ष्मी माता....ॐ जय लक्ष्मी माता मैया जय लक्ष्मी माता ।तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता ॥ॐ जय लक्ष्मी माता...

समृद्धि, संतुलन और कृतज्ञता का भाव
जब जीवन में स्थिरता, संतोष और शुभता की कामना होती है, तब श्री लक्ष्मी जी की आरती मन को आशा और सकारात्मक ऊर्जा से भर देती है। माता लक्ष्मी केवल धन की देवी नहीं, बल्कि संतुलन, सौभाग्य और सद्भाव का प्रतीक हैं।
आरती के समय प्रज्वलित दीप यह संकेत देता है कि सच्ची समृद्धि केवल धन से नहीं, बल्कि शुद्ध विचारों और अच्छे कर्मों से आती है। माता लक्ष्मी का स्मरण हमें स्वच्छता, अनुशासन और कृतज्ञता का महत्व समझाता है।
श्री लक्ष्मी जी की आरती हमें यह सिखाती है कि जहाँ आलस्य, अहंकार और अव्यवस्था होती है, वहाँ लक्ष्मी नहीं ठहरतीं। वे वहीं वास करती हैं जहाँ परिश्रम, मर्यादा और दया का भाव होता है।
जो श्रद्धा और विश्वास से श्री लक्ष्मी जी की आरती करता है, उसके जीवन में सुख-समृद्धि के साथ मानसिक शांति भी बनी रहती है।जहाँ लक्ष्मी माता का नाम है,वहाँ अभाव नहीं — केवल संतोष और सौभाग्य है।यही श्री लक्ष्मी जी की आरती की सच्ची महिमा है।



Comments