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श्री सूर्य देव की आरती

  • Writer: mohit goswami
    mohit goswami
  • Jan 4
  • 2 min read

ऊँ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।


जगत् के नेत्र स्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।


धरत सब ही तव ध्यान, ऊँ जय सूर्य भगवान।।


सारथी अरूण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी। तुम चार भुजाधारी।।


अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटी किरण पसारे। तुम हो देव महान।। ऊँ जय सूर्य ……


ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते। सब तब दर्शन पाते।।


फैलाते उजियारा जागता तब जग सारा। करे सब तब गुणगान ।। ऊँ जय सूर्य ……


संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते। गोधन तब घर आते।।


गोधुली बेला में हर घर हर आंगन में। हो तव महिमा गान ।। ऊँ जय सूर्य ……


देव दनुज नर नारी ऋषी मुनी वर भजते। आदित्य हृदय जपते।।


स्त्रोत ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी। दे नव जीवनदान ।। ऊँ जय सूर्य ……


तुम हो त्रिकाल रचियता, तुम जग के आधार। महिमा तब अपरम्पार।।


प्राणों का सिंचन करके भक्तों को अपने देते। बल बृद्धि और ज्ञान ।। ऊँ जय सूर्य ……


भूचर जल चर खेचर, सब के हो प्राण तुम्हीं। सब जीवों के प्राण तुम्हीं।।


वेद पुराण बखाने धर्म सभी तुम्हें माने। तुम ही सर्व शक्तिमान ।। ऊँ जय सूर्य ……


पूजन करती दिशाएं पूजे दश दिक्पाल। तुम भुवनों के प्रतिपाल।।


ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी। शुभकारी अंशमान ।। ऊँ जय सूर्य ……


ऊँ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान।


जगत के नेत्र रूवरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा।।


धरत सब ही तव ध्यान, ऊँ जय सूर्य भगवान।।



– ऊर्जा, जीवन और सत्य का प्रकाश

जब हर सुबह पहली किरण धरती को छूती है, तब श्री सूर्य देव की आरती जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता भर देती है। सूर्य देव केवल ग्रह नहीं, बल्कि जीवन के मूल स्रोत हैं — प्रकाश, शक्ति और चेतना के प्रतीक।

आरती के समय प्रज्वलित दीप सूर्य की उस अनंत ज्योति की याद दिलाता है, जो बिना भेदभाव के सबको प्रकाश देती है। श्री सूर्य देव का स्मरण हमें अनुशासन, कर्मठता और आत्मविश्वास का पाठ पढ़ाता है।

श्री सूर्य देव की आरती यह सिखाती है कि अंधकार चाहे जितना भी गहरा हो, सत्य और प्रकाश अंततः विजय प्राप्त करते हैं। जिस प्रकार सूर्य हर दिन अस्त होकर फिर उदय होते हैं, वैसे ही जीवन में गिरकर उठने की शक्ति हमें भी मिलती है।

जो श्रद्धा और निष्ठा से श्री सूर्य देव की आरती करता है, उसके जीवन में स्वास्थ्य, तेज और स्पष्टता का संचार होता है।जहाँ सूर्य का प्रकाश होता है,वहाँ आलस्य और भ्रम टिक नहीं पाते।यही श्री सूर्य देव की आरती की दिव्य महिमा है।

 
 
 

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